*कब्जे के चंगुल में चारागाह, छिन गया बेजुबानों का हक*
अतर्रा: गोवंश के विचरण व हरे चारे के लिए गांवों में गोचर (चारागाह) की जमीन उपलब्ध है, लेकिन धीरे-धीरे चारागाह की ये जमीनें गांव वालों के कब्जे में सिमट गईं हैं। बेजुबानों के मुंह का निवाला ही छीन गया है। सरकारी जमीनों से अवैध कब्जे हटाने को शासन ने चार वर्ष पूर्व टास्क फोर्स का गठन किया था। नतीजा शून्य ही रहा है। स्थानीय प्रशासन की लापरवाही के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम सभा की जमीनें तो दूर गोचर की जमीनों के अवैध कब्जे भी नहीं हट सके है।
तहसील क्षेत्र में 108 गांव हैं। जिनमें शासन के मंशानुरूप गांवों ने अतिरिक्त जमीन के अलावा बेजुबानों के हरे चारे के लिए 450 बीघे गोचर (चारागाह) के लिए छोड़ रखी थी, लेकिन अधिकांश गांवों में गोचर की जमीनों में लोगों ने कब्जा कर रखा है। इन जमीनों में किसी में खेती हो रही तो किसी में अन्य उपयोग कर कब्जा कर लिया है। जिसके चलते बेसहारा गाय, बैल, बछड़े किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। शासन के निर्देश पर इन अवैध कब्जों को हटाने के उद्देश्य से जिला व तहसील स्तर पर सन 2017 में एंटी भूमाफिया टास्क फोर्स का गठन हुआ था। जिसके बाद स्थानीय प्रशासन ने गठित कमेटी द्वारा कुछ अवैध कब्जे हटवा खानापूर्ति किया था। टास्क फोर्स द्वारा लगातार जमीनों के अवैध कब्जों में ठोस कार्रवाही न होने के चलते वर्तमान में भी ग्रामीण क्षेत्रों में लोग बेजुबानों के हक में कब्जा किए हुए हैं।