शब-ए-बारात पर अपने पुरखो और रिश्तेदारों को याद कर मग़फिरत की मांगी दुआ पुराने लखनऊ में सजी मस्जीदें इमामबाड़े व कब्रिस्तान में लोगो ने अपने अज़ीज़ों,पुरखो और रिश्तेदारों की क़ब्र पर पढ़ा फातिहा व कुरान पढ़ कर की मग़फिरत के लिए दुआएं।
ऐशबाग कर्बला,गुफरामाआब इमामबाड़ा,तालकटोरा कर्बला,इमदाद हुसैन की कर्बला,आग़ बाक़र,कर्बला अब्बास बाग़ में बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंच अपने पुरखो की कब्रों व इमामबड़ो पर किया चरागां।बताते चलें यह शाबान का महीना हैं इस महीने की 15वीं शब,शबे ए बारात मनाया जाता हैं,यह शब्द दो शब्दों से मिलकर बना हुआ है,शब का मतलब होता है,रात और बारात का मतलब होता है,बरी करना,इस रात मुसलमान अपने पुरखो व रिश्तेदारों की मग़फिरत के लिए दुआएं करते व कुरान पढ़ते हैं यही नहीं इस दिन लोग़ रोज़ा भी रखते है एवं रात भर इबादत कर रब की बारगाह में अपने गुनाहों की माफ़ी माँगते हैं।जानकारी के मुताबिक शाबान की 15 वी तारीख़ को 12"वे इमाम मेहंदी (अ०स०)की पैदाइश यानी जन्मदीन के मौके पर कर्बला,इमामबाड़े व मस्जिदों और घरों में नज़र व महफ़िल का एहतिमाम (आयोजन) किया जाता है।देर रात और तड़के सुबह होते हुए मेहंदी घाट दरिया पर बजरे की बड़ी संख्या में लोग ज़ियारत करते हुए लोग नज़र दिलाकर दुआएं माँगते हैं।







