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महंगाई ने तोड़ी गरीबों की कमर, जाए तो जाए कहां गरीब आदमी? लखनऊ। संवाददाता नबी अहमद लगातार बढ़ती महंगाई और रोजगार के घटते अवसरों ने गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। एक ओर रोजमर्रा की जरूरतों की चीजों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर लोगों को पहले की तरह काम भी नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में गरीब परिवारों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर घर का खर्च कैसे चलाया जाए? एक गरीब परिवार का मुखिया सुबह इस उम्मीद के साथ घर से निकलता है कि आज कोई काम मिल जाएगा और शाम को घर का चूल्हा जल सकेगा। वह दिनभर काम की तलाश में भटकता है, लेकिन कई बार खाली हाथ घर लौटना पड़ता है। खाली जेब और मायूसी के साथ जब वह घर की चौखट पर पहुंचता है तो बच्चे मासूमियत से पूछते हैं—“पापा, हमारे लिए क्या लाए?” इस सवाल का जवाब देना उस पिता के लिए बेहद मुश्किल हो जाता है। महंगाई का असर अब घर की रसोई से लेकर बच्चों की पढ़ाई और इलाज तक साफ दिखाई दे रहा है। खाद्य पदार्थों, रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल, दवाइयों और स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च आम परिवारों पर लगातार आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है। गरीब परिवारों के लिए बच्चों की फीस जमा करना भी बड़ी चुनौती बन गया है। समय पर फीस जमा न होने पर कई जगह अतिरिक्त शुल्क का बोझ भी अभिभावकों को उठाना पड़ता है। शिक्षा के खर्च में केवल फीस ही नहीं, बल्कि किताबें, कॉपियां, स्कूल ड्रेस और अन्य जरूरी सामान भी शामिल हैं। इन खर्चों के बढ़ने से गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों का बजट बिगड़ रहा है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की बेहतर शिक्षा दिलाना चाहते हैं, लेकिन बढ़ते खर्च के कारण कई बार जरूरी जरूरतों और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो जाता है। स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च भी गरीब परिवारों की परेशानी बढ़ा रहा है। गंभीर बीमारी होने पर इलाज का खर्च जुटाना परिवार के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। लंबे इलाज के दौरान दवाइयों, जांच और अस्पताल से जुड़े खर्चों का बोझ परिवार की आर्थिक स्थिति को कमजोर कर देता है। कई मामलों में बीमारी के साथ-साथ परिवार को आर्थिक संकट का भी सामना करना पड़ता है। गरीब परिवार की हालत यह है कि कमाई हाथ में आने से पहले ही कोई न कोई जरूरत सामने खड़ी हो जाती है। राशन, किराया, बिजली-पानी का बिल, बच्चों की फीस, दवा और अन्य घरेलू खर्चों में पूरी कमाई निकल जाती है। बचत करना तो दूर, कई परिवारों के लिए महीने का गुजारा करना ही मुश्किल हो गया है। ऐसे हालात में जरूरत है कि सरकार और संबंधित विभाग महंगाई पर प्रभावी नियंत्रण के साथ गरीबों और मजदूरों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने पर विशेष ध्यान दें। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं आम आदमी की पहुंच में हों, ताकि आर्थिक तंगी के कारण किसी गरीब परिवार को अपने बच्चों की जरूरतों से समझौता न करना पड़े। महंगाई के इस दौर में गरीब आदमी का सवाल बेहद सीधा है—जब कमाई कम और खर्च लगातार बढ़ रहा है, तो आखिर गरीब परिवार जाए तो जाए कहां?

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