जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान ददरौल शाहजहांपुर में निपुण भारत मिशन के अंतर्गत 23 जुलाई से चल रहे चार दिवसीय ब्लॉक स्तरीय संदर्भदाताओं का प्रशिक्षण आज पूर्ण हो गया।





 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान ददरौल शाहजहांपुर में निपुण भारत मिशन के अंतर्गत  23 जुलाई से चल रहे चार दिवसीय ब्लॉक स्तरीय संदर्भदाताओं का प्रशिक्षण आज पूर्ण हो गया। 

संपादक जितेंद्र कुमार के साथ बरेली मंडल प्रभारी नीतू कश्यप की विशेष रिपोर्ट


प्रशिक्षण के अंतिम दिन  सीमैट प्रयागराज और एल एल एफ की राज्य स्तरीय टीम के द्वारा प्रशिक्षण का अनुश्रवण किया गया। राज्य स्तरीय अनुश्रवण टीम के सदस्य वी डी मिश्र और मनोज कुमार गुप्ता के द्वारा प्रशिक्षण की सराहना की गई और कहा गया कि इसी ऊर्जा और जोश के साथ हमें प्रत्येक बीआरसी पर बेसिक के सभी शिक्षकों को प्रशिक्षित करना है और निपुण भारत मिशन के लक्ष्य को साकार करना है। उन्होंने प्राचार्य और संदर्भ दाता के साथ प्रशिक्षण प्रभारी डॉ राकेश कुमार पटेल के प्रयासों की प्रशंसा की। 


 डायट प्राचार्य डॉ अचल कुमार मिश्र के निर्देशन में चल रहे  प्रशिक्षण में भाषा और गणित की दक्षताओं को प्राप्त करने हेतु चार दिनों को विभिन्न सत्रों में विभाजित किया गया था।  प्राचार्य ने कहा कि अध्यापक समाज को प्रेरित करता है और बच्चों का रोल मॉडल होता है। अध्यापक जिस तरह का आचरण और व्यवहार अपने विद्यालयों और बच्चों के बीच करता है उसका प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है। किसी बच्चे को आदर्श नागरिक बनाने में अभिभावक के साथ-साथ शिक्षक की भी बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है। 

डायट प्रवक्ता बीएल मौर्य ने कहा कि जैसा परिवेश हम अपने बच्चों को देंगे हमारा बच्चा उसी तरह का आचरण करने लगेगा।  हम शिक्षक के साथ-साथ अभिभावक भी हैं। जिस दिन हम  शिक्षक और अभिभावक के दायित्व में संतुलन स्थापित कर लेंगे उसी दिन विद्यालयों की दशा बदल जाएगी।  किसी देश में परिवर्तन सड़कों की जगह कक्षा में क्रांति लाने से होती है।


     प्रशिक्षण के प्रथम दिवस  कोविड-19 के बाद अधिगम क्षति को पूर्ण करने के लिए क्या-क्या योजनाएं हो सकती हैं इस पर चर्चा की गई। इसके साथ ही सीखने के मुख्य सिद्धांतों पर समझ बनाना, कक्षा कक्ष में भाषा का प्रयोग कैसे किया जाए इसके साथ ही पूर्व ज्ञान का बच्चों को सिखाने में कितना महत्व होता है इस विषय पर चर्चा हुई।  कक्षा में भाषा सिखाने के वर्तमान तरीके पर चर्चा की गई और भाषा सिखाने की संतुलित पद्धति का भी प्रस्तुतीकरण किया गया। बुनियादी साक्षरता की वार्षिक योजना के  साथ ही अभिभावकों का गृह कार्य में सहयोग कैसे लिया जाए इस पर विभिन्न समूहों में प्रस्तुतीकरण किया गया। दूसरे दिवस को भाषा शिक्षण हेतु निर्धारित किए गए तीन कालांशों की चर्चा की गई। कक्षा कक्ष में मौखिक भाषा विकास एवं संबंधित लेखन की गतिविधियों को विकसित करने के लिए चित्र चार्ट, चित्र कहानी पर कार्य, कविता और कहानी पोस्टर पर कार्य मौखिक शब्दावली विकास खेल से संबंधित उत्साहवर्धक गतिविधियां कराई गई । 


 एसआरजी डॉ अरुण गुप्ता ने कक्षा कक्ष में डिकोडिंग एवं संबंधित ध्वनि लेखन गतिविधियां और वर्ण जागरूकता पर बिग बुक तथा लोगो ग्राफिक के माध्यम से अध्यापन कार्य को संचालित कराने पर जोर दिया। तीसरे दिवस एसआरजी अश्वनी अवस्थी के द्वारा दक्षताओं की प्राथमिकता और वार्षिक योजना की चर्चा की गई। उनके द्वारा साप्ताहिक और दैनिक योजना की संरचना और प्रक्रिया को समझाया गया।  एसआरजी ममता शुक्ला के द्वारा पीपीटी के माध्यम से सीखने के मुख्य सिद्धांतों पर समझ बनाना और बच्चे के घर की भाषा के महत्व की चर्चा की गई उनके द्वारा बताया गया कि शिक्षक बच्चों के घर की भाषा का इस्तेमाल कर बेहतर अधिगम संप्राप्ति कर सकते हैं।


चार दिवसीय प्रशिक्षण को सफल बनाने में डायट प्रवक्ता अरुण कुमार के साथ ए आर पी राकेश कुमार, शैलेंद्र चौहान, पंकज यादव, अजय कुमार माथुर, अखिलेश माथुर, सुखमीत कौर, आशा सिंह, पंकज अवस्थी, रजनीश सिंह, राम शंकर यादव,  ओपी राजपूत, नागेश्वर सिंह, प्रेमपाल, संजीव गंगवार , सुरेश, अमित, बबलू सिंह , मदन गोपाल कटियार, विनोद कुमार , अर्चना राठौर, चंद्रभूषण, पूनम यादव, राजेश चंद्र उपाध्याय , रामकुमार सिंह , शिव वर्मा, दिनेश पाल सिंह, देवेंद्र कुमार, हरवंश पाठक, सर्वेश कुमार गंगवार ,वरुण सिंह, अवनीश कुमार ,संतोष यादव, सुबोध कुमार ,मिथिलेश कुमार, संभव जैन, सुधीर कुमार, रामकिशन, अरुण त्रिपाठी ,विजय गुप्ता , प्रदीप कुमार ,सुरेंद्र सिंह, मुख्तियार अहमद ,राजवीर सिंह, ओम प्रकाश वर्मा , राम अवतार, वैभव मिश्रा, लालमन ,रामवीर पल्लवी वर्मा ,अमिता शुक्ला, मोहम्मद लतीफ , पूर्णिमा रस्तोगी, कामिल खान, आशुतोष मिश्रा, सुनीत बाबू आदि का योगदान रहा।