पंजाब पुलिस ने फर्जी एन.ओ.सी. मामले के मास्टरमाइंड रितिक जैन को किया गिरफ्तार
मोहाली
डेराबस्सी/जीरकपुर
पंजाब पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी डेराबस्सी में फर्जी एन.ओ.सी./नक्शा के जरिए रजिस्ट्री करवाने के मामले के मास्टरमाइंड रितिक जैन को भी बीती रात गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे तीन दिन की रिमांड पर लिया गया है। जबकि पहले गिरफ्तार किए कॉलोनाइजर व स्टांप विक्रेता को तीन नवंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। रितिक 10वीं पास करने के बाद अपने फैमिली बिजनेस से जुड़ गया। उसने आई.टी. प्रोफेशनल को फेल कर डेराबस्सी नगर परिषद की बिल्डिंग ब्रांच की एन.ओ.सी. का क्यू.आर. कोड देख कर उसके जैसा नकली स्कैन कोड बना लिया और तहसील के अधिकारी भी उसके द्वारा बनाई जाली एन.ओ.सी. को चैलेंज नहीं कर सके।
दो दर्जन से अधिक कॉलोनाइजरों और उनके साथियों के नाम इस रैकेट से जुड़ते बताए जा रहे हैं जबकि इस मामले में पुलिस द्वारा 2 अन्य व्यक्तियों के नाम भी शामिल किए गए थे। इसमें से एक कॉलोनाइजर हीरा लाल है, जबकि दूसरा 21 वर्षीय रितिक जैन है जिसने कंप्यूटर ग्राफिक्स का इस्तेमाल कर जाली एन.ओ.सी. तैयार की थी। कॉलोनाइजर हीरालाल अभी भी पुलिस गिरफ्त से बाहर है। पुलिस रिमांड के पहले दिन गुलशन ने न्यू बालाजी नगर कॉलोनी, बक्करपुर में कुल 175 में से 77 प्लॉटों की रजिस्ट्री फर्जी एन.ओ.सी. के आधार पर करवाने की बात कबूल की है। दोनों के खुसाले से पता चला है कि हीरालाल पुत्र नारायण निवासी यू.पी. ने भी कुछ रजिस्ट्रियां करवाई हैं। इसके अलावा दो दर्जन वह नाम हैं जिन्होंने नकली एन.ओ.सी. से रजिस्ट्री करवाई है। इनमें से रितिक गोयल उर्फ गुप्ता पर कंप्यूटर की मदद से जाली एन.ओ.सी. बनाने का आरोप लगाया गया है।
इसी रैकेट में विशेष जांच टीम (एस.आई.टी.) द्वारा गिरफ्तार किए डेराबस्सी के कॉलोनाइजर और स्टांप विक्रेता गुलशन और सुरेश जैन के संबंध में थाना प्रमुख अजितेश कौशल ने बताया कि गुलशन और सुरेश जैन के मोबाइल खंगालने पर कई अहम सुराग मिले हैं। फिलहाल रैकेट के बाकी किरदारों का पता लगाने और उन तक पहुंच करने की कोशिश की जाएगी।
पुलिस अधिकारियों की मानें तो रितिक की गिरफ्तारी से अहम खुलासे होने की संभावना है। उसके साथ डेराबस्सी और जीरकपुर के कॉलोनाइजरों का सीधा संपर्क था। कोई नई कॉलोनी विकसित होती तो दस्तावेजी कार्रवाई रितिक करता था। कॉलोनी से लेकर प्लॉटों की खरीदो-फरोख्त की रजिस्ट्रियों की जिम्मेदारी सिर्फ रितिक की होती थी। कॉलोनाइजरों के अच्छे लिंक होने के कारण तहसील के अंदर अन्य डीड राइटरों तक काम के लिए संपर्क करते थे।
पुलिस विभाग की मानें तो रितिक जैन को अदालत द्वारा रिमांड पर भेजने के बाद अब जांच का दायरा उसके कंप्यूटर को बनाया गया है जिसकी मदद से फर्जी एन.ओ.सी. तैयार की और भविष्य में कितने लोगों को फर्जी एन.ओ.सी. बना कर देना चाहता था। जबकि एन.ओ.सी. की खेल रितिक ने 12 जुलाई से शुरु की थी और वह कॉलोनाइजरों तके साथ मिल कर यह खेल खेलता था। रितिक के अलावा पुलिस ने अब उन कॉलोनाइजरों की सूची बनाई है जो रितिक से फर्जी एन.ओ.सी. की आड़ में सैकड़ों रजिस्ट्रियों करवा चुके हैं।
हमारे राष्ट्र नमन समाचार पत्र के पंजाब के वरिष्ठ क्राइम रिपोर्टर ने पंजाब पुलिस के अधिकारियों से जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि पंजाब पुलिस जल्द से जल्द यह खुलासा करेगी कि किसने जाली एन0 ओ0 सी0/ राजिस्ट्री बनाई है और इस खेल में कितने और लोग हैं शामिल है जल्द से जल्द खुलासा होगा।
