स्वास्थ्य विभाग मौन, यमराज' बने झोलाछाप।
पाठकपुर में अवैध अस्पतालों व फर्जी लैबों का मकड़जाल, 50% कमीशन के खेल में पिस रही गरीब जनता रेलवे फाटक के पास खुलेआम फल-फूल रहा अवैध धंधा,ग्रामीणों में भारी आक्रोश।
दवा से लेकर जांच तक में मोटा खेल, क्या स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से चल रहा है यह सब।
संभल । कोतवाली बहजोई क्षेत्र कस्बा पाठकपुर व आसपास का इलाका इन दिनों अवैध अस्पतालों व झोलाछाप डॉक्टरों की 'अवैध कमाई' का मुख्य केंद्र बन चुका है। क्षेत्र में फर्जी तरीके से चलाई जा रही पैथोलॉजी लैब और बिना डिग्री वाले डॉक्टरों का बोलबाला है, जो चंद रुपयों की खातिर गरीब जनता की जिंदगी से सरेआम खिलवाड़ कर रहे हैं। पूरा खेल राम भरोसे चल रहा है और जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदकर बैठे हैं।
50 फीसदी कमीशन का 'खूनी' खेल विश्वस्त सूत्रों व स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार, कस्बा पाठकपुर में झोलाछाप डॉक्टर और अवैध अस्पताल संचालकों के बीच कमीशन का एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। अस्पताल संचालक, फर्जी लैब संचालकों से सीधे 50 प्रतिशत का मोटा कमीशन वसूल रहे हैं। डॉक्टर मरीजों को जबरन ऐसी जांचें लिख रहे हैं जिनकी जरूरत ही नहीं होती, और फिर लैब संचालकों से आधा हिस्सा अपनी जेब में डाल रहे हैं। इस कमीशनखोरी के चक्कर में गरीब और लाचार जनता को दोनों हाथों से लूटा जा रहा है।रेलवे फाटक के पास 'लूट का अड्डा'
ग्रामीणों का आरोप है कि इस अवैध धंधे का मुख्य गढ़ रेलवे फाटक के पास बना हुआ है। यहां कई झोलाछाप डॉक्टर और फर्जी लैब संचालक बिना किसी वैध लाइसेंस या डिग्री के खुलेआम अपनी दुकानें चमका रहे हैं। गंभीर बीमारियों का इलाज भी यहां बिना किसी विशेषज्ञ के, अंदाज और तुक्के के आधार पर किया जा रहा है, जिससे मरीजों की जान पर हर वक्त खतरा मंडराता रहता है।
ग्रामीणों का बड़ा आरोप आखिर किसके इशारे पर चल रहा है यह खेल। क्षेत्र के ग्रामीणों ने सीधे तौर पर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का साफ तौर पर कहना है कि बिना प्रशासनिक शह और स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत के इतना बड़ा नेटवर्क इतने दिनों तक खुलेआम नहीं चल सकता। क्या स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों के इशारे पर ही गरीबों की जेब पर डाका डाला जा रहा है?
कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूरी। हैरानी की बात यह है कि आए दिन ऐसे मामलों की शिकायतें होने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग का अमला कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है। कभी-कभार दिखावे के लिए जांच की रस्म अदायगी कर दी जाती है, लेकिन धरातल पर ये अवैध अस्पताल और लैब बंद होने का नाम नहीं ले रहे हैं।अब देखना यह होगा कि इस सनसनीखेज खुलासे के बाद जिला प्रशासन व मुख्य चिकित्सा अधिकारी इस मौत के कारोबार पर कब और क्या ठोस कार्यवाही करते हैं, या फिर यूं ही गरीब जनता इन झोलाछापों के रहमोकरम पर लुटने को मजबूर रहेगी।
