आंखों के इलाज के बाद पत्रकार की हालत बिगड़ने का आरोप, स्वतंत्र मेडिकल जांच की मांग

आंखों के इलाज के बाद पत्रकार की हालत बिगड़ने का आरोप, स्वतंत्र मेडिकल जांच की मांग

फरीदाबाद के राष्ट्र नमन समाचार पत्र के ब्यूरो चीफ अरुण शर्मा ने हरियाणा मेडिकल काउंसिल में की शिकायत, स्टेरॉयड दवा के इस्तेमाल और उपचार प्रक्रिया की विशेषज्ञ जांच कराने की अपील

फरीदाबाद। आंखों के उपचार के बाद गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करने वाले मरीज अरुण शर्मा ने दृष्टि आई सेंटर के कंसल्टेंट आई सर्जन डॉ. अमित अरोड़ा के उपचार पर सवाल उठाते हुए हरियाणा मेडिकल काउंसिल से स्वतंत्र चिकित्सकीय जांच कराने की मांग की है। मरीज ने शिकायत में उपचार के दौरान दी गई दवाओं, उनकी खुराक और जरूरी चिकित्सकीय निगरानी की विशेषज्ञों से समीक्षा कराने की अपील की है।

शिकायत के अनुसार, अरुण शर्मा बाईं आंख में परेशानी के उपचार के लिए डॉ. अमित अरोड़ा के पास गए थे। उन्हें ऑप्टिक न्यूराइटिस और ऑप्टिक डिस्क के किनारों पर धुंधलेपन से संबंधित समस्या बताई गई थी। मरीज का आरोप है कि उन्हें वाइसोलोन (प्रेडनिसोलोन) नामक स्टेरॉयड दवा 60 मिलीग्राम की शुरुआती खुराक से दी गई, जिसे बाद में निर्धारित क्रम में कम करना था। इसके बाद उनकी तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ गई और उन्हें 12 सितंबर 2026 को एकॉर्ड अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

मरीज के अनुसार, अस्पताल के रिकॉर्ड में अत्यधिक बढ़ा हुआ रक्तचाप, किडनी की कार्यक्षमता से जुड़ी गंभीर असामान्यताएं, मेटाबॉलिक एसिडोसिस और कैल्शियम की अत्यधिक कमी सहित कई गंभीर चिकित्सकीय समस्याएं दर्ज की गईं।

अरुण शर्मा ने हरियाणा मेडिकल काउंसिल से मांग की है कि मामले की जांच नेत्र रोग विशेषज्ञों और किडनी रोग विशेषज्ञों की स्वतंत्र टीम से कराई जाए। जांच में यह पता लगाया जाए कि स्टेरॉयड दवा की खुराक और अवधि उचित थी या नहीं, उपचार से पहले जरूरी जांच की गई थी या नहीं तथा दवा के संभावित दुष्प्रभावों, निगरानी और फॉलो-अप के संबंध में निर्धारित चिकित्सकीय मानकों का पालन किया गया या नहीं।

मरीज ने यह भी अनुरोध किया है कि विशेषज्ञ उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर यह आकलन करें कि दिए गए उपचार और बाद में सामने आई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के बीच कोई चिकित्सकीय संबंध था या नहीं। उन्होंने कहा है कि मामले में निष्पक्ष जांच के बाद यदि चिकित्सकीय लापरवाही या पेशेवर मानकों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित डॉक्टर के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

शिकायतकर्ता ने मेडिकल काउंसिल को उपचार संबंधी दस्तावेज और अस्पताल की रिपोर्ट उपलब्ध कराने की बात कही है। मामले में आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित डॉक्टर का पक्ष सामने आना बाकी है।