भोलेनाथ का चमत्कार जो कोई नहीं कर पाया वह महादेव ने कर दिया महादेव की कृपा से आंगन में खेले 2 पुत्र पैर से विकलांग 55 की उम्र,71 कांवर-100 का संकल्प

सूनी कोख को जगा गई त्रिलोकी की भक्ति

पैर से विकलांग 55 की उम्र, 71 कांवर-100 का संकल्प

पीलीभीत 

बिलसंडा। भक्ति में बड़ी शक्ति है- ऐसा भगवान का भाव हृदय से रखने बाले हर एक भक्ति को एहसास है। फिर श्रावण मास हो और भोले की भक्ति की बात हो, तो भला कौन होगा जो भोले की भक्ति में रमना नहीं चाहेगा। हर कोई अपने अपने अंदाज और धार्मिक विधान से त्रिलोकी नाथ को रिझाने में लगा हुआ है कोई नित्यप्रति वेलपाती, धतूरा, फल, मिष्ठान, भाग, धतूरा का भोग लगा रहा है तो कोई जलाभिषेक करने के लिए कांवर ला रहा है। केसरिया और प्रीत वस्त्रों में रंगी रमी भक्तों की टोलियां डीजे के साथ थिरकती नजर आ रही है। 

शिवालयों में उमड़ती भीड़ भक्तों की श्रद्वां की अलख जगा रही है। सुबह से शाम तक भक्तों के घन घनाते घंटे घड़ियाल, शंखनाद और गगनभेदी जयघोष से देश‌ का कोना कोना भोले में रमा हृदय स्नेहिल छवि को निखार रहा है। ठीक इन्हीं में शामिल हैं भगवा मुख्यमंत्री के प्रदेश उत्तर प्रदेश जिला पीलीभीत के थाना बिलसंडा के गांव नवदिया पगार के रामपाल वर्मा उर्फ भोले जिनका लक्ष्य 100 कांवर लाने का है और अभी तक 71 कांवर ला चुके हैं इस बीच मार्ग दुघर्टना में एक पैर से अपाहिज होने के बाद भी जज्बा कम नहीं हुआ और इस कदर भक्ति में लीन रहे कि डंडे के सहारे चल कर कठिनाइयों के साथ कांवर लाते हैं। 

55 वर्ष के रामपाल की कांवर यात्रा की दीवानगी के पीछे एक बड़ा कारण छिपा है रामपाल बताते हैं कि शादी के बाद उनके लंबे समय तक संतान नहीं हुई तमाम इलाज कराया कोई फायदा नहीं हुआ डाक्टरों ने साफ इंकार कर दिया कि अब कोई गुंजाइश नहीं है जीवन में संतान उत्पत्ति नहीं हो सकती, फिर क्या रामपाल निराश हो गए और फिर उन्होंने भोलेनाथ पर भरोसा कर उन्हीं में खो गए और भोलेनाथ से संतान मांगी और कांवर लाने का संकल्प लिया फिर क्या था कांवर‌ का सिलसिला शुरू किया और लगातार जारी रखा भगवान भोलेनाथ के आशीर्वाद से आज एक नहीं दो दो संतान वो भी पुत्र उनके जीवन में है यह सब भोलेनाथ की कृपा से ही है कि उनके आंगन में दो संतानें खेल रहे हैं। इस मनौती के बाद वो लगातार कांवर ला रहे हैं एक बार तो दंडबत कांवर ला चुके हैं।

रामपाल की कांवर यात्राएं -

26 बैकुंठी में एक खड़ेश्वरी हरिद्वार से गोला गोकरणनाथ,तीन दंडबत कांवर (पेट के बल लेट लेट कर) नर्वदेश्वर नाथ से नीलकंठ तक, तीस डाक कांवर हरिद्वार से गोला, पांच ऋषिकेश से नीलकंठ, एक फर्रुखाबाद से गोला गोकर्णनाथ सात अन्य कांवर सहित कुल 71कांवर पूर्ण कर चुके हैं और 29 कांवर का अभी संकल्प जारी है। रामपाल एक एक साल में तीन तीन चार चार बार कांवर भी लेकर आए। बातौर रामपाल -18 बी कांवर पूर्ण करने पर पहले पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई और डाक्टरों की भविष्यवाणी फेल हो गई। फिर कुछ अंतराल के बाद दूसरे पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई।

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